The Soul, Brain and Mind.

The mind works according to your body and according to your nature, in which your body will get happiness. It is also difficult to control the mind because it dominates your body.

The mind also uses your brain so that you can gather resources and make plans to relax your body.

The soul remains calm, but your interaction with the soul takes place in very difficult circumstances. It is also only for a short time. At that time your mind and brain cannot dominate your body. But as soon as you are overcome with a difficult situation or you accept them and compromise with them, your mind starts again managing happiness for your body and the use of your brain starts working for the same purpose.

Certainly, regular silence and meditation can make you aware of your purpose. Constant contact with the soul can also be made in the same situation when your mind is under your control. The body and The soul are different and you must know this.

Controlling the mind is your first step towards spirituality. Without controlling the mind, you can think of being spiritual but in reality, you cannot be.

To control the mind, first assess your actions and remove those who are in vain. After that, control your speech. And you will have to do this continuously, only then you can know the ultimate truth.

मन आपके शरीर के अनुकूल तथा आपके स्वाभाव के अनुसार काम करता है जिसमे आपके शरीर को सुख मिलें | मन को नियंत्रित करना भी इसलिए मुश्किल भी होता है क्योकि यह आपके शरीर पर सैदेव हावी रहता है |

मन आपके मस्तिष्क का भी इस्तेमाल करता है जिससे आप अपने शरीर को सुकून देने के लिए संसाधन जुटा सके और योजनायें बना सके |

आत्मा शांत रहती है लेकिन इस आत्मा से आपका साक्षात्कार बहुत ही विकट परिस्तिथियों में होता है | केवल अल्प समय के लिए होता है | उस समय आपका मन और मस्तिष्क आपके शरीर पर हावी नहीं हो पाता | लेकिन जैसे ही आप विकट परिस्तिथियों से उबरने लगते है या उन्हें स्वीकार कर के उनसे समझौता कर लेते है आपका मन पुनः आपके शरीर के लिए सुख का प्रबंध करना शुरू कर देता है तथा आपके मस्तिष्क का प्रयोग भी उसी प्रयोजन के लिए काम पर लग जाता है |

निश्चित रूप से नियमित मौन और ध्यान ही आपको आपके उद्देश के प्रति सजग कर सकता है | आत्मा से निरंतर संपर्क भी उसी स्तिथि में बन सकता है जब आपका मन आपके वश में हो | शरीर और आत्मा दोनों ही अलग है और आपको यह अवश्य जानना चाहिए |

मन को नियंत्रित करना ही आध्यात्मिकता की और आपका पहला कदम है | बिना मन को नियंत्रित किये आप अध्यात्मिक होने की सोच सकते है लेकिन वास्तव में हो नहीं सकते |

मन को नियंत्रित करने के लिए सर्वप्रथम अपने कर्मो का आकलन करें तथा उनमे से जो व्यर्थ व्यसन है उन्हें दूर करें | तत्पश्चात अपनी वाणी पर नियंत्रण करें | और यह आपको निरंतर सुधर करते हुए करना होगा तभी आप परम सत्य को जान सकते है |

Mahesh Mundra

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