“अरणि मंथन” (Arani Manthan) वैदिक परंपरा में दो अरणि-काष्ठों को रगड़कर अग्नि उत्पन्न करने की प्रक्रिया को कहा जाता है।
- अधो-अरणि — नीचे रखा जाने वाला लकड़ी का टुकड़ा
- उत्तरा-अरणि — ऊपर घूमाया/रगड़ा जाने वाला टुकड़ा
- दोनों के मंथन से अग्नि प्रकट होती है।
इसका गहरा प्रतीकात्मक अर्थ
अरणि मंथन को केवल अग्नि पैदा करने की तकनीक नहीं, बल्कि ज्ञान और चेतना के जागरण का प्रतीक भी माना जा सकता है।
घर्षण → ऊष्मा → अग्नि → प्रकाश
इसी तरह जीवन में प्रयास, अनुशासन और निरंतर साधना से भीतर छिपी क्षमता प्रकट होती है।
