Brihadharm Puranam

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Brihadharmpuranam with Hindi translation by S.N. Khandelwal

कृष्णद्वैपायनमहर्षिव्यासविरचितम्

बृहद्धर्मपुराणम्

हिन्दी अनुवाद सहित

भाषाभाष्यकार एस. एन. खण्डेलवाल

चौखम्बा संस्कृत सीरीज आफिस pages 462

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Brihadharmpuranam with Hindi translation by S.N. Khandelwal

कृष्णद्वैपायनमहर्षिव्यासविरचितम्

बृहद्धर्मपुराणम्

हिन्दी अनुवाद सहित

भाषाभाष्यकार एस. एन. खण्डेलवाल

चौखम्बा संस्कृत सीरीज आफिस

महर्षि वेदव्यास प्रणीत उपपुराण बृहद्धर्मपुराण को उपपुराणों में अन्यतम माना गया है। अठारह पुराणों के साथ ही अठारह उपपुराणों का भी प्रणयन महर्षि वेदव्यास ने किया था, यह कहा जाता है। पुराणों की विषयवस्तु जितनी अध्यात्मपरक, साधनापरक तथा तत्वपूर्ण है, उसी की झलक उपपुराणों में भी मिलती है। उपपुराण भी पुराणों की ही भावना से ओतप्रोत हैं। कुछ अंश में तो यह प्रतीत होता है कि उपपुराणों का उत्कर्ष पुराणों के ही समान है। बृहद्धर्मपुराण में पुराणों के आधार भूत सभी तत्वों तथा उपक्रमों का समावेश सम्यक् तथा संक्षिप्त रूप से किया गया है। इसकी विचित्रता यह है कि इस पुराण के समापन के साथ-साथ उसी समापन स्थल पर इसमें राजा वेण द्वारा प्रवर्तित किये गये जातिसंकर प्रसंग को भी जोड़ दिया गया है, जो अन्य पुराणों में नहीं मिलता। इस प्रसंग के अनुसार यह विदित होता है कि संकर जातियों की उत्पत्ति के मूल कारण राजा वेण थे। उन्होंने ही जातिगत संकर प्रथा का प्रारम्भ कराया था। तदनन्तर यह प्रसंग मिलता है कि राजा वेण के उत्तराधिकारी ने अपनी उदात्त वृत्ति का परिचय देते हुये, उस संकर जाति के लिये उपयुक्त सामाजिक व्यवस्था का विधान किया था तथा उनके जीविकार्थ कर्तव्य कर्म की भी व्यवस्था किया था। यह एक अलौकिक प्रसंग इस उपपुराण में प्राप्त होता है।

मुझे अनुवाद काल में इस पुराण की दो प्रति प्राप्त हो सकी थी। प्रथम थी बंगवासी प्रेस से मुद्रित प्राचीन बंगाक्षर प्रति, द्वितीय थी महामहोपाध्याय हरप्रसादशास्त्री द्वारा सम्पादित देवनागरी अक्षरों की प्रति। बंगवासी प्रेस की प्राचीन प्रति में कतिपय अध्याय अधिक थे, जो हरप्रसादशास्त्री द्वारा सम्पादित प्रति में प्राप्त नहीं थे, जैसे कृष्णलीला प्रसंग तथा संकर जाति प्रसंग। इसलिये मैंने अपने अनुवाद में उन अध्यायों को भी मूल के साथ संयोजित कर दिया। वे मुझे क्षेपकरूप अध्याय नहीं लगे। इसका कारण यह है कि हरप्रसादशास्त्री द्वारा सम्पादित प्रति में उपपुराण का समापन अचानक हो गया लगता है। कथावाचक का कथा कहकर प्रस्थान, श्रोतागण का स्वस्थान गमन आदि अंश उसमें न होने के कारण लगा कि इस प्रति में कहीं कुछ छूट गया है। मुझे बंगवासी प्रेस वाली प्रति में यह पुराण आद्यन्त प्रतीत हुई। उसे देखने से ज्ञात हुआ कि इसका अचानक समापन न होकर विधिवत् समापन हुआ है।

आजकल पाश्चात्य धारा का विशेष प्रभाव होने के कारण यह प्रथा हो गई है कि पुराण की विषयवस्तु, उसके संदेश तथा उसकी अन्तरात्मा के स्थान पर उसकी ऐतिहासिकता, उसके सम्बन्ध में किस पाश्चात्य विद्वान् ने क्या कहा, उसका काल, उसकी भाषा आदि-आदि अनेक जटिलतायें खड़ी करके पुराणों के उपोद्घात के रूप में विशेष पाण्डित्य प्रदर्शन की परम्परा चल गयी है, जिससे किसी पुराण प्रेमी को कुछ लेना देना नहीं रहता। पुराणों का पाठक इस प्रवृत्ति का होता है कि उसे आम का रसास्वादन करना है, आम्रकुंज में कितने आम्रवृक्ष है, इसकी गणना से उसे क्या प्रयोजन? साथ ही वह किस काल में लिखी गयी इत्यादि-इत्यादि विवेचना को जानने से पाठक का क्या पारलौकिक लाभ होगा? इन सबसे तो उसकी वृत्ति और भी बहिर्मुख होगी तथा मन में पुराण की प्रामाणिकता के प्रति संदेह बीज का अंकुरण होने लगेगा। प्राचीन टीकाकार इस तत्व को जानते थे तथा वे इन सब ग्राम्य चर्चा से पाठकों का मन. उद्वेलित न करके पूर्णतः पुराण की अन्तरात्मा की गहन गंभीरता में पाठक का प्रवेश कराते थे। अतः मैं इन सब प्रसंगों को परमतत्व लाभार्थ पुराण में व्यर्थ समझ कर पुराण में वर्णित विषयों के प्रति ही एकनिष्ठ रहते हुये तथा उसके सारतत्व को ही ग्रहण करते-करते अनुवाद कार्य में प्रवृत्त रह गया। “संत हंस गुण गहहिंपय” नीरक्षीर विवेकी हंस को तो उसका सारमात्र ही चाहिये। अतः “वारिविकार” रूप वितण्डा को विद्वानों के श्रमार्थ छोड़ता हूं।

अध्याय

विषयानुक्रमणिका

पूर्वखण्ड

१. मंगलाचरण, सूत तथाः ऋषिगण संवाद

२. बृहद्धर्मपुराण कथारम्भ, धर्म महिमा

३. पितृ-मातृ भक्ति वर्णन

४. तुलाधार व्याध का उपाख्यान

५. गुण निर्णय

६. तीर्थ उत्पत्ति, गंगामहिमा, गंगास्तव

७. तुलसी प्रादुर्भाव

८. तुलसी महिमा

९. कृष्ण-शंकर समागम

१०. लक्ष्मीकृत शिवस्तव, श्रीफल प्रादुर्भाव

११. बिल्ववृक्ष (श्रीफलवृक्ष) महिमा

१२. आमलकी आविर्भाव प्रसंग

१३. नैमिषारण्य तीर्थोत्पत्ति

१४. ज्ञातिकर्त्तव्य निरूपण

१५. वैशाखादि कालतीर्थ वर्णन

१६. श्रीपञ्चमी प्रभृति समयतीर्थ वर्णन तथा अगस्त्य को अर्घ्यदान

१७. पक्षश्राद्धविधि

१८. राम का रणारम्भ, रावणबधोपाय

१९. सीताहरण वृत्तान्त

२०. हनुमान का लंका गमन हनुमान तथा सीता संवाद

२१. श्रीराम का लंकागमन, देवीबोधन देवीवोधनोपाय

२२. देवीस्तव, राम को वर प्राप्ति, रावणवध

२३. कोजागरी आदि व्रत वर्णन, द्वादशाक्षर विष्णुस्तुति

२४. जन्मदिवस आदि कालतीर्थ वर्णन

२५. पुराणादि वर्णन, उपपुराण, रामायणादि उत्पत्ति वर्णन

२६. रामायण प्रशंसा

२७. पुराणरचना में ऋषिगण में मतभेद

२८. ऋषियों की परीक्षा

२९. पुराणादि लेखक निर्णय, वाल्मीकि द्वारा व्यास को उपदेश

३०. वाल्मीकि द्वारा व्यास को भारत तत्वोपदेश

३१. सृष्टि प्रकरण, पुरुष सृष्टि

३२. देवसृष्टि

३३. सतीस्वयम्बर

३४. शिवकृत सतीप्रतारणा

३५. शिवद्वारा सतीहरण तथा दक्ष का शिवद्वेष रुद्रद्वेषनिवेदन

३६. दक्षयज्ञ, सती का दशमहाविद्यारूप धारण तथा यज्ञस्थल में जाना

३७. सती का देहत्याग

३८. शिवद्वारा दक्षयज्ञध्वंस, दक्षपत्नी कृत शिवस्तुति

३९. दक्षकृत शिवस्तुति-यज्ञ को शिवद्वारा सफल करना

४०. दक्षशोक पीठोत्पत्ति विवरण

४१. शक्तिस्तव, शक्ति द्वारा सबको शाप, विष्णु स्तोत्र

४२. गङ्गोत्पत्तिवर्णन

४३. देवसभा तथा शिव गंगा का मिलन

४४. शिवगान

४५. बलि उपाख्यान, अदिति की तपस्या

४६. अदिति कृत विष्णुस्तव, वामन्जन्म

४७. वामन द्वारा बलि को छलना

४८. सगरवंश ध्वंस, भगीरथ जन्म

४९. भगीरथ की तपस्या

५०. भगीरथ द्वारा गंगास्तुति, वरप्राप्ति

५१. गंगावतरण

५२. सगरवंशोद्धार, गंगामहिमा

५३. गौरी जन्म, विवाहादि

५४. गंगाकृत्य वर्णन

५५. गंगा महिमा-गंगायात्रा विधि

५६. काककर्णोपाख्यान

५७. गंगा का शिवपूजा विधान

५८. गंगा श्राद्धविधि, अष्टमुख षोडशमुख ब्रह्मा के साथ चतुर्मुख ब्रह्मा का संवाद

५९. वंश-मन्वन्तर कथन

६०. गणेश जन्म वर्णन

१. विविध धर्म कथन, प्रणामोपदेश

२. ब्राह्मण धर्म वर्णन

३. राजधर्म वर्णन

४. वैश्य-शूद्र धर्म वर्णन

५. आश्रमधर्म वर्णन

६. गृहस्थ धर्म वर्णन

७. वानप्रस्थ एवं यतिधर्म वर्णन

८. स्त्री धर्म वर्णन

९. पूजा विधान

१०. विविध व्रत वर्णन

११. नवग्रह विवरण, नवग्रह स्तव

१२. हिंसा निवारण-ज्वर-मृत्यु वर्णन

१३. जाति निरूपण

१४. संकर जाति व्यवस्था

१५. दानधर्म कथन

१६. श्रीकृष्ण जन्म कथन

१७. श्रीकृष्णलीला वर्णन

१८. कृष्णलीला वर्णन

१९. कलि धर्म कथन

२०. महापातकादि कथन

२१. पुराण प्रशंसा

Weight 1010 g
Dimensions 24 × 19 × 2 cm

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