Pramukh Deviyan (Main Goddess)

20.00
0
1216 Pramukh Deviyan (Main Goddess) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

भारतीय दर्शन की आद्याशक्ति प्रकृति ही है। इसी कारण शक्ति को जगत्में प्रमुख स्थान दिया गया। शक्ति और शक्तिमान दोनों परस्पर अभिन्न हैं। कलिकाल में तो शक्ति-उपासना विशेष फलदायी है। प्रस्तुत पुस्तक में भगवती शक्ति के द्वारा दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती, गायत्री, पार्वती, सीता, राधा तथा गङ्गा रूप में की गयी लीलाओं का सुन्दर परिचय दिया गया है । भगवती के प्रत्येक लीला-चरित्र के साथ उनका सुन्दर बहुरंगा चित्र भी दिया गया है।

Pramukh Devta (Prime Deities of Hindu Religion)

20.00
0
1215 Pramukh Devta (Prime Deities of Hindu Religion) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

इस पुस्तक में प्रमुख देवताओं के बारें में संक्षिप्त में तथा उनकी कहानियाँ पढ़ने को मिलती है |बच्चो के संस्कार तथा ज्ञान वर्धन के लिए छोटे में रंगीन चित्रों के साथ बहुत ही सुन्दर पुस्तक है | इसे पढ़कर हमारे महान ग्रंथो के बारे में जानकारी मिलती है |

भगवान् श्री गणेश, भगवान् श्री सूर्य, भगवान् श्री विष्णु, भगवान् श्री शिव, भगवान् श्री ब्रह्मा, भगवान् श्री राम, भगवान् श्री कृष्णा, रुद्रावतार श्री हनुमान, अग्निदेव

Pramukh Rishi-Muni ( Prime Saint-Ascetic)

25.00
0
1442 Pramukh Rishi-Muni ( Prime Saint-Ascetic) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

इस पुस्तक में प्रमुख ऋषि – मुनि के बारे में तथा उनकी कहानियाँ पढ़ने को मिलती है |बच्चो के संस्कार तथा ज्ञान वर्धन के लिए छोटे में रंगीन चित्रों के साथ बहुत ही सुन्दर पुस्तक है | इसे पढ़कर हमारे महान ऋषि – मुनि के बारे में जानकारी मिलती है |

Pret Manjari ( Ath Sradha Paddati )

70.00
0
Pret Manjari ( Ath Sradha Paddati ) with Hindi Translation by Pt. Matry Prashad Panday Publishd by Jyotish Prakashan, Varanasi

Book for Shradha Paddati (Ath Pret Manajri) in Sanskrit with Hindi Translation Edited by Pt. Matr Prashad Pandey

Purushottam Sahastranaam Stotram

10.00
0
॥ श्रीहरिः ।। 2021   Purushottam Sahastranaam Stotram with Namawali by Gita Press.

2021 पुरुषोत्तमसहस्त्रनामस्तोत्रम् [ नामावलीसहितम् ]

सम्पूर्ण श्रीमद्भागवत में वर्णित भगवान् श्रीहरि की लीलाओं के आधारपर बना एक प्राचीन सहस्त्रनामस्तोत्र

Raag Shashtra (Part 1)

100.00
0
Raag Shashtra (Part 1) Book for learning Raag (Learn Classical Indian Singing Raag ) written by Dr Gita Banerjee

1st Part of Series to learn Raag (Classical Singing) in an easy way.

 

RadhaKrishna Rahasya

136.00
0
Radha Krishna Rahasya of Pandit Thakura Prashad Sharma “Datta” Published by Sampurnanad Sanskrit University, Varanasi

राधाकृष्णरहस्य

ब्रजभाषा एवं संस्कृत में छन्दोबद्ध काव्यकृति राधाकृष्णरहस्य का प्रथम संस्करण प्रकाश में आया था फतेहपुर नवीनगर (जनपद सीतापुर) से सन् १९४२ ई. में। इस कृति के यशस्वी प्रणेता थे आचार्य पण्डित ठाकुर प्रसाद शर्मा ‘दत्त’।

 

Raja Ram (Ram Leela Series 3)

25.00
0
1116 Raja Ram (Ram Leela Series 3) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

भगवान् श्रीराम के पावन चरित्र का परिचायक, ‘श्रीराम’ चित्रकथा का यह तीसरा भाग श्री भरत को पादुका देना, शुपर्नखा को दंड, खर-दूषण से युद्ध, माया-मृग, सीता-हरण,जटायु पर कृपा,शबरी के आश्रम में, सुग्रीव से मित्रता, बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि वध,हनुमान को मुद्रिका देना,सीता द्वारा हनुमान को चूड़ामणि दान, हनुमान का भगवन श्री राम को चूड़ामणि सौपना,समुद्र-ताडन, राम-रावन युद्ध,सीता की अग्नि-परीक्षा ,श्री राम राज्याभिषेक के विषयों से सुसज्जित किया गया है। प्रत्येक कथा के साथ उससे सम्बन्धित सुन्दर चित्र पुस्तक को और भी आकर्षक बनाते हैं। बालकों को चरित्र-शिक्षा देने के साथ उन्हें श्री राम की सुन्दर लीला का ज्ञान कराने के लिये यह पुस्तक सर्वोत्तम है।

 

Ram Lala (Ram Leela Series 1)

25.00
0
1016 Ram Lala (Ram Leela Series 1) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

भगवान् श्री राम का चरित्र भारतीय संस्कृति का प्राण है बालकों को संस्कारवान् और आदर्श नागरिक बनाने में श्रीरामचरित्र से बढ़कर कोई अन्य चरित्र नहीं है। प्रस्तुत पुस्तक के इस नवीन संस्करण में मनु-शतरूपा को वरदान, देवताओं की प्रार्थना, श्रीरामावतार, सच्चिदानन्द के ज्योतिषी, दशरथ के भाग्य, धनुर्विद्या का अभ्यास, सखाओं के साथ मृगया आदि श्रीराम की सतरह बाल-लीलाओं का अत्यन्त ही मनोहर चित्रण किया गया है। प्रत्येक लीला के साथ उस लीला से सम्बन्धित सुन्दर चित्र भी दिया गया है। आकर्षक चित्रावरण में उपलब्ध यह पुस्तक बाल-युवा, स्त्री-पुरुष सबके लिये समान उपयोगी है।

 

Ramagya – Prashan ( Bhav arth Sahit)

12.00
0
109 SriGoswamiTulsidasJiVirchit Ramagya – Prashan ( Bhav arth Sahit) with Hindi Translation by Gita Press, Gorakhpur

यह ग्रन्थ सात सर्ग में समाप्त हुआ है। प्रत्येक सर्ग में सात सात सप्तक हैं और प्रत्येक सप्तक में सात-सात दोहे हैं। इसमें श्रीरामचरितमानस की कथा वर्णित है; किन्तु क्रम भिन्न हैं । प्रथम सर्ग तथा चतुर्थ सर्ग में बालकाण्ड की कथा है। द्वितीय सर्ग में अयोध्याकाण्ड तथा कुछ अरण्यकाण्ड की भी। तृतीय र्में अरण्यकाण्ड तथा किष्किन्धाकाण्ड की कथा है। पंचम सर्ग में सुन्दरकाण्ड तथा लंकाकाण्ड की, षष्ठ सर्ग में राज्याभिषेक की कथा तथा कुछ अन्य कथाएँ हैं। सप्तम सर्ग में स्फुट दोहे हैं और शकुन देखनेकी विधि है।

Ramayan ke Pramukh Patra (Main characters of Ramayana)

25.00
0
1443 Ramayan ke Pramukh Patra (Main characters of Ramayana) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

इस पुस्तक में रामायण के प्रमुख पात्रो के बारें में तथा संक्षिप्त में तथा उनकी कहानियाँ पढ़ने को मिलती है |बच्चो के संस्कार तथा ज्ञान वर्धन के लिए छोटे में रंगीन चित्रों के साथ बहुत ही सुन्दर पुस्तक है | इसे पढ़कर हमारे महान ग्रंथो के बारे में जानकारी मिलती है |

Ravan Samhita (Sampoorn) सम्पूर्ण रावण संहिता ( संस्कृत -हिंदी अनुवाद सहित )

725.00
0

Ravan Samhita  With the Hindi Commentary

EDITED BY Dr.. Surkant Jha (Jyotishacharya )

रावणसंहिता लेखक – डॉ० सुरकान्त झा (Pages 1190)

शिवपुराण के अनुसार रावण के द्वारा उपदिष्टित विषयों को समय-समय पर उनका पुत्र इन्द्रजित् मेघनाद ने संगृहित कर ‘रावणसंहिता’ के रूप में प्रकट किया था। सम्प्रति भी रावण या मेघनाद के नाम से अनेक ग्रन्थ उपलब्ध होते हैं. जिनमें प्रमुख रूप से चातुर्ज्ञान, उड्डीशतन्त्र, कियोड्डीशतन्त्र, अर्कप्रकाश. कुमारतंत्र, रावणसंहिता आदि प्रसिद्ध है, विद्वानों के अनुसार रावण से सम्बन्धित अर्थशास्त्र, नीतिशास्त्र, युद्धशास्त्र के ग्रन्थ आदि भी उपलब्ध रहे हैं. परन्तु इस पंक्ति के लिखने तक इनके बारे में  बहुत प्रयास के बाद भी कोई उल्लेखनीय जानकारी नहीं प्राप्त हो सकी।

प्रस्तुत ‘रावणसंहिता’ के प्रतिपाद्य विषयों को छः तरङ्गों में विभाजित कर विषयानुक्रम से अधोलिखित प्रकार सजा दिया गया है-प्रथम रावणवृत्त तरंग में रावण के जीवन से सम्बन्धित विविध विषयों, द्वितीय शिवोपासना तर के अन्तर्गत रावण की शिवभक्ति, तृतीय योगमुद्रा तरंग में रावण का योग विषयक ज्ञान, चतुर्थ तरङ्ग के अन्तर्गत रावणप्रोक्त तंत्र साधना, पंचम चिकित्सा तर में रावण का चिकित्ग विषयक ज्ञान और षष्ठ तरह के अन्तर्गत इनका ज्योतिष विषयों का व्याख्यान को समुचित स्थान प्रदान किया गया है।

Rehal (Book Reading Stand)

Current price is: ₹199.00. Original price was: ₹299.00.
0

Rehal is used for keeping holy books on it for purity and easily reading.

Rehal is an X-shaped foldable book rest used for placing holy books during recitation.

Wood Type: Sisham

Size: 15 ” inches

Sisham Rehal (sisham Book stand/rest)

Saam Vediya Rudra Jap Vidhi

70.00
0
The Saam Vediya Rudra Jap Vidhi (Padpath Samhinta with Hindi English Translation)

इस संग्रह का प्रयोजन यह है कि जो महानुभाव सामवेद की रुद्री का अध्ययन करना चाहते हैं उनको सब सामग्री एक ही स्थान पर मिल जाय ।अंग्रेजी भाषा का ज्ञान व उसमें अभिरुचि रखनेवाले जो महानुभाव वेदों के प्रति भी श्रस्था रखते हों तथा वेद-प्रतिपादित विषयों की जानकारी प्राप्त कर उससे लाभान्वित होना चाहते हों उनके लिये प्रामाणिक अंग्रेजी अनुवाद भी यथाक्रम उपन्यस्त कर दिया गया है।

 

Sachitra Aarti Sangrah with Colourful Pictures and Mantra

20.00
0

आरती कैसे करनी चाहिये? How to do Aarti ?

आरती पूजन के अन्त में इष्ट देवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है। इसमें इष्ट देव को दीपक दिखाने के साथ ही उनका स्तवन तथा गुणगान किया जाता है।

आरती में पहले मूलमन्त्र (जिस देवता का जिस मन्त्र से पूजन किया गया हो, उस मन्त्र) के द्वारा तीन बार पुष्पांजलि देनी चाहिये और ढोल, नगारे, शंख, घड़ियाल आदि महावाद्यों तथा जय-जयकार के शब्द के साथ शुभ पात्र में वृत से या कपूर से विषम संख्या की बत्तियाँ जलाकर आरती करनी चाहिये।

साधारणतः पाँच बत्तियों से आरती की जाती है, इसे ‘पंचप्रदीप’ भी कहते हैं। एक, सात या उससे भी अधिक बत्तियों से आरती की जाती है। कपूर से भी आरती होती है। पद्मपुराण में आया है

‘कुंकुम, अगर, कपूर, घृत और चन्दन की सात या पाँच बत्तियाँ बनाकर अथवा रूई और घीकी बत्तियाँ बनाकर शंख, घण्टा आदि बाजे बजाते हुए आरती करनी चाहिये।’

Sachitra Sri Hanuman Chalisa (with Pictures)

10.00
0
1979 Sachitra Sri Hanuman Chalisa ( in Red Colour with pictures ) by Gita Press, Gorakhpur.

सचित्र हनुमान चालीसा ( लाल रंग में रंगीन चित्रों सहित )

जब भी समय मिले श्री हनुमान जी का स्मरण करें तथा श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें

भक्तो तथा बच्चो के बीच वितरण करने योग्य पुस्तक |

हनुमान चालीसा – संकटमोचन हनुमानाष्टक , श्री हनुमत् स्तवन, श्री राम वंदना, श्री राम स्तुति, श्री रामावतार, शिवपंचाक्षरस्तोत्रम्  हनुमान जी की आरती सहित |

जय श्री राम !!

जय श्री राम !!

 

Sachitra Stuti Sangrah (Gita Press)

10.00
0
1355 Sachitra Stuti Sangrah by Gita Press, Gorakhpur

This book has Stutis along with pictures of Shiva, Sri Ganesh, Sri Surya, Sri Vishnu, Sri Lakshmi Narayan, Sri Ram, Sri Ram Darbar, Sri Krishna, Sri Radha, Sri Kartikeya, Sri Durga, Sri Maha Kali, Sri Lakshmi ,Sri Saraswati, Sri Gayatri, Sri Ganga, Sri Hanuman.

Colourful and Printed on Art paper.

Sadhan-Sudha-Sindhu

300.00
0
465 Sadhan Sudha Sindhu by Gita Press, Gorakhpur

एक साधकोपयोगी दुर्लभ ग्रन्थ साधन-सुधा-सिन्धु  श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज के पूर्वप्रकाशित महत्त्वपूर्ण प्रवचनों एवं लेखों का अनूठा संग्रह

प्रस्तुत ग्रन्थ में परमश्रद्धेय श्रीस्वामीजी महाराज के उन लेखों एवं प्रवचनों का अनूठा संग्रह है, जो अब तक अनेक पुस्तकों के रूप में अथवा स्वतन्त्र रूप में प्रकाशित होते रहे हैं। भगवत्प्रेमी साधकों के लिये यह संग्रह बहुत उपयोगी है और शीघ्र एवं सुगमतापूर्वक परमात्मत्त्व का अनुभव कराने में बहुत सहायक है।

Sai Baba Vrat Katha साईं बाबा व्रत कथा

Current price is: ₹5.00. Original price was: ₹10.00.
1

शिर्डी वाले साईंबाबा का गुरुवार का चमत्कारी व्रत जिसमें व्रत की पूरी विधि, नियम उद्यापन, साईं अष्टोत्तरशत, नामावली, साईं बावनी, साईं प्रार्थना, पद, आरती आदि का अनूठा संग्रह है। ॐ साईं ॐ

Sanatan Dharmoddharah (with Hindi Commentary)

928.00
0

Sanatan Dharma Uddhar With the Hindi Commentary

EDITED BY PROF. VACHASPATI DWIVEDI

Ex-Head, Department of Education Sampurnanand Sanskrit Vishvavidyalaya Varanasi

जब काशी में विश्वविद्यालय के स्थापना करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, उस समय विश्वविद्यालय का एक प्रधान उद्देश्य यह प्रकाश किया गया था कि धार्मिक तथा नीति सम्बन्धी शिक्षा देकर नवयुवकों में मानसिक बल के साथ साथ धर्मबल और चरित्रबल बढ़ाया जाय। प्रस्ताव के प्रकाश होने पर कई मित्रों ने यह पूछा कि हिन्दू जाति में कितने ही सम्प्रदाय हैं और सभी अपने अपने सम्प्रदाय के अनुसार अपना धार्मिक जीवन बनाते हैं। ऐसा कौन ग्रन्थ है जिसको पढ़ाने में सब सम्प्रदाय वालों की सम्मति हो जावेगी। मैंने यह उचित समझा कि सनातनधर्म का एक ऐसा संग्रह बनाया जाय जिसको सब सम्प्रदाय स्वीकार करें और जिसके द्वारा नवयुवकों को धर्म के सिद्धान्तों की और प्रधान उपदेशों की शिक्षा मिले।

ऐसा एक संग्रह बनाया गया और जनवरी १९०६ में प्रयाग में अखिल भारतवर्षीय सनातनधर्म के सामने कुम्भ मेले के अवसर पर प्रूफ में रक्खा गया। १९०६ के कुम्भ के अवसर पर सनातन धर्म महासभा के सभापति पूज्यपाद गोबर्धन मठ के श्रीशंकराचार्य जी थे। सभा में और भी बड़े बड़े विद्वान् और तपस्वी उपस्थित थे। एक सहस्र के लगभग संग्रह की प्रतियाँ विद्वानों के सामने रक्खी गईं। विद्वानों ने संग्रह को बहुत अच्छा माना और यह सम्मति प्रकट की कि संग्रह पूरा करके प्रकाशित किया जाय। उन विद्वानों में मेरे मित्र पण्डित उमापति द्विवेदी, उपनाम पण्डित नकछेद राम दुबे भी थे। उनकी यह सम्मति थी कि संग्रह एक निबन्ध के रूप में प्रकाशित किया जाय जिसमें पूर्वापर का सम्बन्ध हो और जिसमें सनातनधर्म के जटिल प्रश्नों का विचार भी हो।

पंडित उमापति जी इन विद्याओं के निधि थे, विशेष कर दर्शनशास्त्र के वे बड़े भारी विद्वान् थे। मैंने पंडित जी से निवेदन किया कि आप के समान दूसरा कौन विद्वान् है जिससे ऐसा ग्रन्थ लिखने को कहा जाय – आप स्वयं इस कार्य को उठाइये। पंडित जी ने ग्रन्थ का लिखना अङ्गीकार किया और बहुत परिश्रम से बहुमूल्य “सनातनधर्मोद्धार” नाम का ग्रन्थ बना दिया। पंडित उमापति जी के उत्तराधिकारियों ने यह ग्रन्थ हिन्दू विश्वविद्यालय को दे दिया है जिसके लिए हम उनके कृतज्ञ है। ग्रन्थ बड़ी प्रौढ़ संस्कृत भाषा में लिखा गया है और ग्रन्थकार ने सम्पूर्ण

ग्रन्थ का हिन्दी अनुवाद भी सरल और स्वच्छ भाषा में कर दिया है जिससे केवल हिन्दी जानने वालों को भी ग्रन्थ का अभिप्राय विदित हो जाय।

जो विद्वान् इस ग्रन्थ को पढ़ेंगे, उनको विदित होगा कि धर्मोउपदेश का ऐसा दूसरा ग्रन्थ दुर्लभ है। पाठशाला और विद्यालय के विद्यार्थियों को इसका ज्ञान अत्यन्त उपकारी होगा और मेरा विश्वास है कि इस ग्रन्थ के द्वारा न केवल हिन्दू युवकों को, किन्तु सर्वसाधारण में जैसे जैसे यह ग्रन्थ पढ़ा व पढ़ाया जायगा, व कथा और उपदेश के द्वारा जनता में इसके सिद्धान्तों का ज्ञान फैलेगा, उतना

ही इसके पढ़ने वालों की संख्या बढ़ेगी और पढ़नेवालों में सत्य धर्म का ज्ञान और उसमें श्रद्धा बढ़ेगी। उस समय कुण्डधार के इस कथन की सत्यता समझ में आएगी कि

पृथ्वीं रत्नपूर्णा वा महद्वा रत्नसञ्चयम् ।

भक्ताय नाहमिच्छामि भवेदेष तु धार्मिकः ॥

रत्न से भी पृथ्वी अथवा बड़ा रत्नों का ढेर मैं अपने भक्त के लिये नहीं। चाहता। मैं चाहता हूँ कि वह धार्मिक हो और नीचे लिखे दूसरे वचन की भी सत्यता का विश्वास लोगों के हृदय में जड़ पकड़ेगा

विद्या रूपं धनं शौर्य कुलीनत्वमरोगता ।

राज्यं स्वर्गश्च मोक्षश्च

सर्व धर्मादवाप्यते ॥

अर्थात् विद्या, रूप, धन, वीरता, कुलीनता, निरोगपन, राज्य, स्वर्ग और मोक्ष, यह सब धर्म से प्राप्त होता है। इसीलिये महाभारत और पुराण पुकार पुकार कर यह कहते हैं कि “यतो धर्मस्ततो जयः “- जहाँ धर्म है वहाँ जय है ।

यह ग्रन्थ सनातनधर्म के ज्ञान का उत्तम प्रदीपक है। सब सभा, पाठशाला और विद्यालय के अधिकारियों को चाहिये कि इसकी एक एक प्रति अपने पाठशाला या विद्यालय और सभा में रक्खें और इसके द्वारा अपनी अपनी संस्थाओं में सनातनधर्म के उपदेशों का प्रचार करें। जिस परमात्मा के अनुग्रह से यह ग्रन्थ बनाया गया है, उसी से प्रार्थना है कि इसके द्वारा सनातनधर्म के लोकोपकारी सिद्धान्तों का सारे देश में प्रचार हो और समस्त जगत का हित हो।

मदनमोहन मालवीय

Sandhya

5.00
0
614  Sandhya by Gita Press, Gorakhpur

This book has methods and Mantras of Sandhaya Poojan.