Mohan (Krishna Series 3)

15.00
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871 Mohan in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

श्री कृष्ण- चित्रकथा के इस भाग में ब्रह्मा जी के मोह भंग से लेकर श्री कृष्ण के द्वारा दर्जी और माली पर कृपा तक की नौ सुन्दर लीलाओं के वर्णन के साथ उनके आकर्षक एवं बहुरंगे चित्र भी दिए गए है |

MUDRA RAHASYA With Hindi Commentary

85.00
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MUDRĀ RAHASYA With Hindi Commentary By Pt. Harihar Prasad Tripathi

The finger postures of Devpujan are mentioned in the presented book ‘Mudra Rahasya’. Along with this, the finger postures of yogic instruments are also mentioned. Yoga practitioner becomes devoid of Jaravayadhi due to the sheltering of finger postures. Many types of painful diseases are also eliminated through these finger postures.

Publisher : CHOWKHAMBA KRISHNADAS ACADEMY VARANASI

Mul Ramayan

5.00
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223 Mul Ramayan By Gita Press, Gorakhpur
223 वाल्मीकीयरामायणान्तर्गत मूलरामायण हिन्दी-अनुवादसहित

आजकल रामायण और भागवत-ये ही दो ग्रन्थ ऐसे हैं जो मोहमहासागर की भँवर में पड़े हुए प्राणियों को पार लगाने के लिये जहाज कहे जा सकते हैं। इन्हीं दो ग्रन्थ रत्नों ने राम-कृष्ण के नामों की महिमा बताकर अनन्त भगवद्भक्तों का महान् उपकार किया है और आज भी कर रहे हैं। वास्तव में रामायण और भागवत के रूप में भगवान् राम तथा कृष्ण ही अपने दर्शन एवं अमृतमय उपदेश से हमें कृतार्थ कर रहे हैं।

 

Naamkaran Sanskar ( with Pooja Vidhi )

30.00
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Naamkaran Sanskar by Dr Kunj Bihari Sharma Edited by Prof. Ram Murti Sharma Published by Sampurnanand Sanskrit University, Varanasi

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की प्रकाशन-प्रन्थमालाओं ने प्राय्य भारतीय विद्याओं की प्रायः समस्त शाखाओं को अभिव्याप्त किया है। इस विश्वविद्यालय के द्वारा माननीय कुलपति प्रो. राममूर्ति शर्मा जी की प्रेरणा से एक नयी ग्रन्थमाला ‘संस्कार ग्रन्थमाला ‘ का प्रवर्तन हुआ है।

Nakshatra Vigyan in Hindi

115.00
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Nakshatra Vigyan Book (Hindi) by Madhukar Gopal Nene, Dr. Surkant Jha

आकाश दर्शन क्रम में ताराओं का ज्ञान, वर्गीकृत आकाशीय नक्सा तथा अनेक सारिणीयों से युक्त; सभी वर्ग व स्तर के पाठकों के ज्ञान को विस्तार और उनको आत्मिक आनन्द प्रदान करने में सक्षम

Publisher: CHOWKHAMBA, VARANASI

Narad Bhakti Sutra and Shandilya Bhakti Sutra

7.00
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Narad Bhakti Sutra and Shandilya Bhakti Sutra with Hindi Translation by Gita Press Gorakhpur.

 

Narad Puran

250.00
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1183 Narad Puran in Hindi ( Brief) with pictures Bold Type by Gita Press, Gorakhpur

‘नारदपुराण’ में कल्याणकारी श्रेष्ठ विषयों का उल्लेख है। इसमें वेदों के छहों अङ्गों-(शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, ज्योतिष और छन्द-शास्त्रों )- का विशद वर्णन तथा भगवान्की सकाम उपासना का भी विस्तृत विवेचन है। भगवान्की सकाम आराधना भी उत्तम है सकाम उपासक धीरे-धीरे निष्काम भाव बनने पर भगवद्धक्ति के उत्कर्ष के बाद अन्त में भगवत्प्राप्ति कर लेने में समर्प हो जाता है। आशा है आत्म-कल्याणकामी पाठकों और सभी आद्धाल. जिज्ञासुजनों के लिये प्रस्तुत इस ‘नारदपुराण’ का अध्ययन विशेष उपयोगी सिद्ध होगा।

Navdurga

20.00
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205  NavDurga  ( Details with Pictures of 9 Forms of Maa Durga ) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

आदिशक्ति त्रिपुरसुन्दरी पराम्बा दुर्गा के नवों स्वरूपों का परिचय देने वाली गीताप्रेस से प्रकाशित अद्भुत पुस्तक । इसमें भगवती दुर्गा के नवों स्वरूपों के उद्भव, उपासना-विधि तथा इससे प्राप्त होने वाले फलों का अत्यन्त ही रोचक भाषा में सुन्दर वर्णन किया गया है। पुस्तक में माँ दुर्गा के नवों स्वरूपों के आकर्षक रंगीन चित्र भी दिये गये हैं।

Navdurga (Pocket Size) Gita Press

5.00
1

1307 Navdurga Pocket Size by Gita Press. This book has descriptions of nine Durga Swarup with pictures and mantra.

Small size for easy to carry in the pocket.

Navgrah

20.00
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787  Navgrah ( Spiritual Information of Nine Planets ) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

प्रस्तुत पुस्तक में नवग्रह के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारियां, पूजन विधि, श्लोक, मन्त्र तथा मंत्र जाप विधि भी दी गयी है | पुस्तक में नवग्रह का ध्यान तथा नवग्रह कवच का पाठ भी दिया हुआ है |

Nawadha Bhakti

15.00
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292 Nawadha Bhakti by Gita Press, Gorakhpur

भक्ति ही एक ऐसा साधन है, जिसको सभी सुगमता से कर सकते हैं और जिसमें सभी मनुष्यों का अधिकार है। इस कलिकाल में तो भक्ति के समान आत्मोद्धार के लिये दूसरा कोई सुगम उपाय है ही नहीं, क्योंकि ज्ञान, योग, तप, याग आदि इस समय सिद्ध होने बहुत ही कठिन हैं और इस समय इनके उपयुक्त सहायक सामग्री आदि साधन भी मिलने कठिन हैं, इसलिये मनुष्य को कटिबद्ध होकर केवल ईश्वर की भक्ति का ही साधन करने के लिये तत्पर होना चाहिये। विचार करके देखा जाय तो संसार में धर्म को मानने वाले जितने लोग हैं, उनमें अधिकांश ईश्वर भक्ति को ही पसंद करते हैं। अब हमको यह विचार करना चाहिये कि ईश्वर क्या है और उसकी भक्ति क्या है? जो सबके शासन करने वाले, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान् सर्वान्तर्यामी हैं, न्याय और सदाचार जिनका कानून है, जो सबके साक्षी और सबको शिक्षा, बुद्धि और ज्ञान देनेवाले हैं तथा जो तीनों गुणोंसे अतीत होते हुए भी लीला मात्र से गुणों के भोक्ता हैं, जिनकी भक्ति से मनुष्य सम्पूर्ण दुर्गुण, दुराचार और दुःखों से विमुक्त होकर परम पवित्र बन जाता है, जो अव्यक्त होकर भी जीवों पर दया करके जीवों के कल्याण एवं धर्म के प्रचार तथा भक्तों को आश्रय देने के लिये अपनी लीला से समय-समय पर देव, मनुष्य आदि सभी रूपों में व्यक्त होते हैं अर्थात् साकार रूप से प्रत्यक्ष प्रकट होकर भक्तजनों को उनके सार दर्शन देकर आह्लादित करते हैं। और जो सत्ययुग में श्रीहरि के रूप में, त्रेतायुग में श्रीराम रूप में,द्वापर युग में श्रीकृष्ण रूप में प्रकट हुए थे, उन प्रेममय नित्य अविनाशी विज्ञानानन्दघन, सर्वव्यापी हरिको ईश्वर समझना चाहिये।

Nawin Anuwad Chandrika

125.00
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Nawin Anuwad Chandrika ( Book for learning Sanskrit language translation) written by Pt. Ramakant Tripathi Published by Chowkhamba, Kashi

A Short book for easily understands and learning Sanskrit translation.

Nitya karm Pooja Prakash (Gita Press) Book

80.00
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प्रस्तुत पुस्तकमें प्रात:काल जागरणके पश्चात् प्रात:कालीन भगवत्स्मरणसे लेकर शौचाचार, आभ्यन्तर-शौच, दन्तधावन विधि, क्षौरकर्म, स्नान, संध्योपासन, जप, तर्पण, ब्रह्मयज्ञ, बलिवैश्वदेव आदि पञ्चमहायज्ञोंका विवेचन, देवपूजन, मानसपूजा, सूर्य-नमस्कार, नित्य-दान, संकल्प-विधि, अतिथि सत्कार, भोजन विधि, शयन-विधान आदि प्रकरणों के साथ-साथ नित्य पाठ करनेके स्तोत्रोंका संग्रह भी किया गया है तथा विभिन्न देवोंकी दैनिक उपयोगमें आनेवाली स्तुति और आरतीका संकलन हुआ है। विशिष्ट पूजा-प्रकरणके अन्तर्गत स्वस्तिवाचन, गणेश-पूजन, वरुणकलश-पूजन, पुण्याहवाचन, नवग्रह-पूजन, षोडशमातृका, सप्तघृतमातृका, चतुष्पष्टियोगिनी तथा वास्तुपूजनका भी संग्रह हुआ है। इसके साथ ही पञ्चदेव, शिव, पार्थिवेश्वर, शालग्राम तथा महालक्ष्मी-दीपमालिका आदिके पूजन- विधान भी प्रस्तुत किये गये हैं।

प्रत्येक मनुष्यके चौबीस घंटेमें २१,६०० बार श्वास चलते हैं। अत: प्रति श्वासके अनुसार भगवन्नाम-स्मरण होना ही चाहिये। शास्त्रोंमें अजपाजपकी एक सरल प्रक्रिया है, उसे भी यहाँ दिया गया है। पुस्तकके अन्तमें विभिन्न देवोंकी पूजामें विहित एवं निषिद्ध पत्र-पुष्पोंका विवेचन भी हुआ है, जो अर्चकोंके लिये अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

इस पुस्तकका लेखन-कार्य परमाचार्य श्रीयुत पं० श्रीरामभवनजी मिश्रने प्रारम्भ किया, बीचमें ही उनका काशी-लाभ हो जानेके कारण शेष भागका लेखन उनके सुपुत्र श्रीलालबिहारीजी मिश्रने सम्पन्न किया।

Nitya Stuti aur Prarthana

5.00
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444 Nitya Stuti aur Prarthana ( Bhakt ke Udgaar) by Swami Ramsukh Das by Gita Press, Gorakhpur

  • Panchamrit
  • Nitya Stuti
  • Daily Reading 5 shlokas of Gita
  • Prarthna
  • Prarthna aur Sharnagati

 

 

Om Namah Shivay

25.00
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204 ” Om Namah Shivaya ” ( 12 Jyotirlingas )_ in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

भगवान् शिव के द्वादश ज्योतिर्लिङ्गों की पुराणों तथा अन्य धर्मग्रन्थों में अपरम्पार महिमा बतायी गयी है। इन्हें शिवजी का साक्षात् स्वरूप कहा गया है। इनके दर्शन, स्पर्श और पूजन से भक्तों को सभी मनोवाञ्छित वर प्राप्त होते हैं। अब तक इनकी उत्पत्ति, स्थापन और माहात्म्य का परिचय देने वाली कोई स्वतन्त्र पुस्तक उपलब्ध नहीं थी। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिये “ॐ नमः शिवाय” नामक पुस्तक का प्रकाशन किया गया है। इसमें कथा के रूप में सारी बातें सरल भाषा में समझायी गयी हैं। । साथ ही प्रत्येक ज्योतिर्लिङ्ग के आकर्षक रंगीन चित्र भी दिये गये हैं। इस पुस्तक के अवलोकन-अध्ययनद्वारा भक्त और श्रद्धालुजन भरपूर लाभ उठा सकते हैं।

 

Panchang Poojan Padhati

20.00
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2228 Panchang Poojan Padhati by Gita Press, Gorakhpur

(समस्त मांगलिक कार्यों, देवपूजा के पूर्व अनिवार्य पाँच कर्मकाण्डीय कृत्यों की सम्पूर्ण प्रयोग-विधि)

पंचांग-पूजनकर्म के प्रधान कर्मो के अन्तर्गत मुख्य रूपसे १. कलशस्थापन, २. पुण्याहवाचन, ३. रक्षाविधान ( आयुष्यमन्त्रपाठ ), ४. नवग्रह पूजन तथा ५. नान्दीमुख श्राद्ध – ये पाँच कर्म समाहित हैं।

इन सभी कर्मो को यथाविधि सम्पादित करने की सम्पूर्ण विधि इस ‘पंचांग-पूजन- पद्धति’ नामक पुस्तक में दी गयी है। मन्त्रभाग संस्कृत में है और निर्देश हिन्दी में हैं। वैदिक मन्त्रों के साथ-साथ पौराणिक मन्त्र भी दिये गये हैं। पुस्तक में परिशिष्ट के अन्तर्गत सुविधा की दृष्टि से कुशकण्डिका सहित होमविधि इत्यादि महत्त्वपूर्ण बातोंका भी समावेश किया गया है।  यह पुस्तक सर्वसाधारण की जानकारी के लिये तथा कर्मकाण्ड कराने वाले विद्वज्जनों के लिये अत्यन्त उपयोगी है, इसी दृष्टि से इसे स्वतन्त्र रूप से प्रकाशित किया गया है । यथास्थान रेखाचित्र भी दिये गये हैं

Panchdev Athavrshirsha Sangrah (Gita Press)

15.00
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Panch Dev Athrav Sirsha book from Gita Press, Gorakhpur with translation.

Ganesh Atharvsirsham, Shiv Atharvsirsham, Dev Atharvsirsham, Narayan Atharvsirsham, Surya Atharvsirsham

Parvati Mangal (with meaning)

7.00
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113 SriGoswamiTulsidasJiVirchit Parvati Mangal (with meaning in Hindi ) by Gita Press, Gorakhpur

जानकी-मंगल में जिस प्रकार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्रीराम के साथ जगज्जननी जानकी के मंगलमय विवाहोत्सवका वर्णन है, उसी प्रकार पार्वती मंगल में प्रात:स्मरणीय गोस्वामीजी ने देवाधिदेव भगवान् शंकर के द्वारा जगदम्बा पार्वती के कल्याणमय पाणिग्रहण का काव्यमय एवं रसमय चित्रण किया है। लक्ष्मी-नारायण, सीता-राम एवं राधा-कृष्ण अथवा रुक्मिणी-कृष्ण की भाँति ही गौरी-शंकर भी हमारे परमाराध्य एवं परम वन्दनीय आदर्श दम्पति हैं।

रामचरितमानस की भाँति यहाँ भी शिव-बरात के वर्णन में गोस्वामी जी ने हास्यरस का अत्यन्त मधुर पुट दिया है और अन्त र्मे विवाह एवं विदाई का बड़ा ही मार्मिक एवं रोचक वर्णन करके इस छोटे-से काव्य का उपसंहार किया है।

Pauranic Deviya (Mythological goddesses)

15.00
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1420 Pauranic Deviya (Mythological goddesses) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

इस पुस्तक में प्रमुख पौराणिक देवियाँ के बारे में तथा उनकी कहानियाँ पढ़ने को मिलती है |बच्चो के संस्कार तथा ज्ञान वर्धन के लिए छोटे में रंगीन चित्रों के साथ बहुत ही सुन्दर पुस्तक है | इसे पढ़कर हमारे महान पौराणिक देवियाँ के बारे में जानकारी मिलती है |

Prachin Bal- Kahaniya ( Ancient Child Stories )

30.00
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2072 Prachin Bal- Kahaniya ( Ancient Child Stories ) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

A collection of 11 Ancient Child Stories in Hindi with Pictures to develop well beingness in children.

  • महर्षि वाल्मीकि
  • महर्षि व्यास
  • सत्यकाम जाबाल
  • भक्त परीक्षित्
  • मातृपितृभक्त श्रवणकुमार
  • तपस्याका फल
  • गणेशजीकी बुद्धिमानी
  • मोहका फल
  • सत्यकी महिमा
  • परोपकार
  • चैतन्य महाप्रभु

Pramukh Aartiyan (Pocket Size) Gita Press

5.00
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1845 Pramukh Aartiyan Pocket Size by Gita Press. This book has Aarti of Ganesh ji, Bhagwan Jagdishwar, Lakshmi Ji, Sri Janki Nath, Sri Kunj Bihari, Sri Radha Rani, Maa Amba, Mata Saraswati and Hanuman ji

Pocket Size 1845 Pramukh Artiyan by Gita Press.