Balako ko Seekh (Learning for Children)

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1693 Balako ko Seekh (Learning for Children) in Hindi Rhymes way and pictures) by Gita Press Gorakhpur.

इस छोटी-सी पुस्तक में लेखक के द्वारा छोटे-छोटे वाक्यों में बालकों के मन पर उत्तम संस्कार डालने वाली बहुत-सी काम की बातें दी गयी हैं | उनके चरित्र-निर्माण में पर्याप्त सहायक सिद्ध होंगी।

Balakon ke Kartavya

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287 Balakon ke Kartavya by Gita Press, Gorakhpur

‘बालकोंके कर्तव्य’ नामक इस पुस्तिका में ब्रह्मलीन श्रद्धेय श्री जयदयाल जी गोयन्दका के प्रभावशाली बालकोपयोगी दो निबन्ध को प्रकाशित किया गया है। इनमें हमारी पवित्र भारतीय संस्कृति के अनुसार बालकों के जीवन को शुद्ध, समुन्नत तथा सुखी बनाने वाले कर्तव्य का बड़ा ही सुन्दर शास्त्रीय बोध कराया गया है। आज की बढ़ती हुई अनुशासनहीनता एवं उच्छृंखलताओं के वातावरण में इस पुस्तिका के प्रचार से बहुत कुछ सुधार हो सकता है।

 

Balakon ki Baaten

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1691 Balakon ki Baaten by Gita Press, Gorakhpur

यह पुस्तिका गुजरात के प्रसिद्ध भक्त-लेखक स्व० अमृतलाल सुलन्दर जी पढियार की ‘बालकोनी बातो’ का अनुवाद है। अनुवाद में मूल पुस्तक का कुछ भाग कहीं-कहीं छोड़ दिया गया है, कहीं दो चार पंक्तियाँ बढ़ायी भी गयी हैं। मूल पुस्तक श्री भिक्षु अखण्डानन्दजी के द्वारा स्थापित ‘सस्तुं साहित्यवर्धक कार्यालय’ अहमदाबाद से प्रकाशित हुई थी।

गीताप्रेसद्वारा ‘बालसाहित्य’ प्रकाशन की भी यही पहली पुस्तक है। इसमें बातचीत के रूप में बहुत ही उत्तम उपदेश दिया गया है। आशा है, हमारी शिक्षासंस्थाओं और अभिभावकों के द्वारा इस पुस्तकका आदर होगा तथा हमारे बालकों के लिये यह बहुत लाभकारी सिद्ध होगी।

 

Balakopayogi Kahaniyan (Child Stories)

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2070 Balakopayogi Kahaniyan (Child Stories) in Hindi with pictures) by Gita Press Gorakhpur.

इस पुस्तक में बच्चो को अपने पर्वो तथा अनेक पौराणिक महान लोगों  के बारें में तथा संक्षिप्त में उनकी कहानियाँ पढ़ने को मिलती है |बच्चो को संस्कार तथा  ज्ञान वर्धन  के लिए छोटे में रंगीन चित्रों के साथ बहुत ही सुन्दर पुस्तक है | संकलन – पंडित राम कृष्ण शर्मा

Bhagwan Naam Mahatmya ( Ram Naam Lekhan Book )

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2153 Bhagwaanam Mahatmay (28860 Naam – Jaap) Ram Naam Writing Book by Gita Press, Gorakhpur

‘कलियुग में केवल श्रीहरि का नाम ही- हरिका नाम ही— हरिका नाम ही परम कल्याण करने वाला है, इसको छोड़कर अन्य कोई उपाय नहीं है।’

When devotees start writing on this notebook as a daily habit. He feels the greatness of Lord Ram.

You can write 28860 times “Ram” on this notebook.

Bhagwan Naam Mahima aur Prarthana Ank ( 39th Year Kalyan Special Edition)

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Bhagwan Naam Mahima aur Prarthana Ank ( 39th Year Kalyan Special Edition) in Hindi by Gita Press Gorakhpur.

इस विशेषाङ्क में अनेक संत-महात्माओं, महापुरुषों, मनीषी विद्वानों, विचार कों और अनेक अनुभव-सिद्ध महानुभावों द्वारा भगवन्नाम-जप की महिमा तथा प्रार्थना के महत्त्व एवं प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इसी तरह प्रार्थना के महत्त्व एवं प्रार्थना के प्रकार तथा स्वरूप पर भी इसमें गम्भीर विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

इसके अतिरिक्त इसमें भगवन्नाम जप और प्रार्थना के चमत्कारिक प्रभाव विषयक अनेक अनुभवी विद्वानों तथा मनीषियों द्वारा अनुभूत सत्य घटनाओं के उल्लेख एवं तद्विषयक सत्य कथा-कहानियों के रूप में प्रस्तुत मार्मिक सामग्री ने इसकी रोचकता, प्रभाव तथा प्रामाणिकता को और भी अधिक बढ़ा दिया है।

Bhagwan Surya ( Lord Sun)

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868 Bhagwan Surya ( Lord Sun)) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

प्रस्तुत पुस्तक-भगवान् सूर्य। इसमें बारह आदित्यों के चित्ताकर्षक चित्र के साथ-साथ प्रत्येक मास के सूर्य का ध्यान, वर्ण, आयुध, व्रत-उपासना तथा लीला-कथा का सरस चित्रण है। धर्मप्राण जिज्ञासुओंके लिये इस पुस्तक में शास्त्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। यह निश्चय ही भगवान् सूर्य के बहुआयामी स्वरूप के सम्बन्ध विस्तृत जानकारी उपलब्ध करायेगा जो नयी होनेके साथ-साथ उपयोगी भी सिद्ध होगी।

 

Bhagwat Navneet ( Sant Sri Ram Chandra Keshav Dongre Ji Maharaj )

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2009  Bhagwat Navneet ( Sant Sri Ram Chandra Keshav Dongre Ji Maharaj ) by Gita Press, Gorakhpur

संत श्री राम चन्द्र केशव डोंगरे जी महाराज की भागवत कथाओं तथा वचनों का संग्रह |

 

Bhagwat Stuti Sangrah ( including Hindi Translations, Story context, glossary )

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1092 Bhagwat Stuti Sangrah ( including Hindi Translations, Story context, glossary ) by Gita Press, Gorakhpur

1092 भागवत स्तुति संग्रह भाषानुवाद, कथाप्रसंग और शब्दकोष सहित

प्रकृत ग्रन्थ में पाठकों का सरलता से प्रवेश हो जाय इसलिये प्रकृत ग्रन्थ का विषय थोड़े में दिखलाना अनुचित न होगा। ग्रन्थकार ने प्रकृत ग्रन्थ को नव अध्यायों में विभक्त किया है।

हर एक अध्याय में अनेक प्रकरण हैं। पहले अध्याय में छः प्रकरण हैं। उनमें बाललीला, शिशुलीला, कुमारलीला, पौगण्डलीला तथा किशोरलीला इत्यादि के प्रसंग में जो-जो स्तुतियाँ आयी हैं उनका ठीक-ठीक अर्थ लिखकर उन स्तुतियों के पहले प्रकरण का सम्बन्ध भी आवश्यक एवं उपयोगी लेख से प्रदर्शित किया गया है। जहाँ-जहाँ कोई शंकास्पद स्थल आया है वहाँ वहाँ सुन्दर तथा प्रबल युक्तियों से, निष्पक्ष बात देकर ग्रन्थ के अभिप्राय का निरूपण किया गया है। ग्रन्थपाठ करते समय प्रत्येक प्रकरण में पाठक स्वयं ही इस बात का अनुभव करेंगे।

Bhajan Sangarh (GitaPress)

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54 Bhajan Sangrah by Gita Press.

इस भजन संग्रह के प्रारम्भ में गोसाई तुलसीदास, महात्मा सूरदास और संतवर कबीरदास के पदों का संकलन है । भलित साहित्यमें इन तीनों ही महात्माओंकी दिव्य बानियाँ अनुपम है, तदनन्तर अष्टछाप के अनन्य भक्तों तथा हितहरिवंश, स्वाधी हरिदास, गदाधर भट्ट, हरिराम व्यास आदि व्रज रस मधुकरोंकी सुललित गुलजार और नानक, दादूदयाल, रैदास, मलूकदास आदि संतोंके पदों का  संक्षिप्त संग्रह है । ग्रन्थ के  मध्यमें कुछ हरिभक्त देवियोंके पदोंका संग्रह है।

Bhakt Narsih Mehta

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168 Bhakt Narsih Mehta by Gita Press, Gorakhpur

भक्तराज नरसिंहराम का जीवन अलौकिक बातों से भरा हुआ है। यद्यपि हमारी तुच्छ बुद्धि के लिये सारी बातों का रहस्य समझना और उन पर विश्वास करना कठिन है, फिर भी वे बातें हमारे अन्दर एक विचित्र आशा का संचार कर सकती हैं, जिसका प्रकाश हमें कल्याण मार्ग पर अग्रसर होने में पर्याप्त सहायक हो सकता है।

 

Bhaktraj Dhruv ( Adarsh Charitmala -5 )

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189 Bhaktraj Dhruv ( Adarsh Charitmala -5 ) by Gita Press, Gorakhpur

भक्तराज ध्रुव के नाम और चरित्र से हम सभी परिचित हैं। एक छोटी-सी घटना से ध्रुव के जीवन में एक महान् क्रान्ति हो गयी और वही उनके भगवत्साक्षात्कार का कारण भी बन गयी। छ: वर्ष का छोटा बालक भगवान्के पथ में किस निष्ठा के साथ जा रहा है, यह हम सभी के लिये सर्वथा अनुकरणीय है। साधनकाल में कैसे-कैसे प्रलोभन उसके सामने आये, पर एक भी उसे डिगा नहीं सका और अन्त में स्वयं भक्तवत्सल भगवान्को उसके सम्मुख प्रकट होना पड़ा। साधना भी उसकी कितनी सरल एवं सरस थी- द्वादशाक्षर-मन्त्र का जप और सब अवस्थाओं में भगवान् नारायण का ध्यान! इसी साधना से ध्रुव के सारे मनोरथ पूर्ण हो गये-केवल छः महीनेके भीतर।

 

Bhaktraj Hanuman ( Adarsh Charitmala -1 )

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185 Bhaktraj Hanuman ( Adarsh Charitmala -1 ) by Gita Press, Gorakhpur

यह ‘आदर्श चरितमाला’ का प्रथम पुष्य ‘भक्तराज हनुमान’  है। इसमें की अधिकांश बातें तो वाल्मीकीय रामायण, अध्यात्मरामायण, रामचरितमानस, पद्मपुराण और ब्रह्माण्डपुराण आदि ग्रन्थों से ली गयी हैं। कुछ बातें परम्परा से सुनी हुई है। सम्भव है वे भी किसी ग्रन्थ में हो। आशा है, पाठक भक्त प्रवर श्रीहनुमान्जी के पवित्र पुण्य-जोवन को पढ़कर प्रसन्न होंगे।

Bhartiya Sanskriti

250.00
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Bhartiya Sanskriti ( A book for all about ancient Indian Tradition, education, Sanskar and All about Indian Culture written by Dr Deepak Kumar Compiled by Dr Uma Shankar Sharma “rishi” Published by Chowkhamba, Kashi

 

Brihadharm Puranam

Current price is: ₹895.00. Original price was: ₹925.00.
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Brihadharmpuranam with Hindi translation by S.N. Khandelwal

कृष्णद्वैपायनमहर्षिव्यासविरचितम्

बृहद्धर्मपुराणम्

हिन्दी अनुवाद सहित

भाषाभाष्यकार एस. एन. खण्डेलवाल

चौखम्बा संस्कृत सीरीज आफिस pages 462

Brihatparasharhorashashtram बृहत्पराशरहोराशास्त्रम

325.00
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Brihart Parashar Horashastram

महर्षिपराशरप्रणीतम्

बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्

‘प्रज्ञावर्द्धिनी’ अभिनव हिन्दीव्याख्यया श्लोकानुक्रमणिका च संवलितः

टीकाकार: सम्पादकश्च डॉ. सत्येन्द्र मिश्रः

समस्त जातकग्रन्थों में यह विलक्षण ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में जितने विषय उक्त हैं उतने विषय अन्य किसी ग्रन्थ में नहीं हैं। एक यहीं ग्रन्थ “गागर में सागर” तुल्य हैं क्योंकि मात्र एक इसी ग्रन्थ का अध्ययन कर होरास्कन्ध के समस्त विषयों का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है महर्षि ने अपनी अतीन्द्रिय ज्ञानवैभव से इस ग्रन्थ को रचा है। ज्योतिष के होरा (फलित) स्कन्ध के इस ग्रन्थ के विषय में इतना तो अवश्य कहा जा सकता है कि “यदिहास्ति तदन्यत्र यन्नेहास्ति न तत्क्वचित्”

इस ग्रन्थ में जो दुरुहस्थल हैं उन्हें चक्र सारणियों के द्वारा स्पष्ट करके समझा दिया गया है जिससे कि पाठकवर्ग को विषयज्ञान में सौविध्य हो इस ग्रन्थ के अन्त में श्लोकानुक्रमणि भी दे दी गई है जो कि आज तक किसी भी प्रकाशित प्रति में नहीं थी, यह प्रति छात्रवर्ग एवं शोधकर्त्ताओं के लिए लाभकर रहेगी।

Pages : 616

BrihatSamhita (Sri Varahmihiracharya ) of Sampurnanand Sankrit University,Varanasi

Price range: ₹500.00 through ₹2,499.00
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Brihat Samhita of Sri Varah Mihir Acharya With the Commentary of Bhattotpala and Hindi Commentary BY ĀCĀRYA NĀGENDRA PĀŅDEYA Published by Sampurnanad Sanskrit University, Varanasi in 4 Vols.

बृहत्संहिता के महत्व से सभी विद्वान् सुपरिचित हैं। ज्योतिषशास्त्र के अध्ययन हेतु इसकी अनिवार्यता सम्पूर्ण भारतवर्ष में देखी जा सकती है। ज्योतिषगणित तथा फलित में समान-गतिक आचार्यों का वराहमिहिर के अतिरिक्त अभाव ही देखा जाता है। संहितास्कन्ध का तो वराहमिहिर के पश्चात् किसी अन्य आचार्य ने स्पर्श तक नहीं किया है।

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Chalisa Paath Sangrah (51 Chalisa, Stotra and Aarti)

Current price is: ₹50.00. Original price was: ₹60.00.
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Chalisa Paath Sangrah book in bold text in Red Colour with Stotra and Aarti.

Book for reciting various Chalisa and Aarti.

51 Chalisa, Stotra and Aarti

 

Chalisa Paath Sangrah Colour ( 12 Chalisa with Aarti)

Current price is: ₹40.00. Original price was: ₹50.00.
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Chalisa Paath Sangrah of 12 primary God- Goddess with Colour Pictures and Aarti

Printed on Glossy Paper and laminated.

Sri Ganesh Chalisa & Aarti, Sri Durga Chalisa & Aarti, Sri Shiv Chalisa and Aarti, Sri Hanuman Chalisa and Aarti, Sri Shani Chalisa and Aarti, Sri Kaali Chalisa and Aarti, Sai Chalisa and Aarti, Balaji Chalisa and Aarti, Sri Lakshmi Chalisa and Aarti, Sri Khatu Shyam Chalisa and Aarti, Sri Saraswati Chalisa and Aarti, Sri Ram Chalisa and Aarti

 

 

Charak Samhita of Mahrshi Agnivesa (With Sanskrit – Hindi Commentary)

Price range: ₹450.00 through ₹2,400.00
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महर्षि अग्निवेशप्रणीत चरक संहिता

श्रीचक्रपाणिदत्तविरचित ‘आयुर्वेददीपिका’ व्याख्या एवं आयुर्वेददीपिका’ की तत्त्वप्रकाशिनी हिन्दी व्याख्या तथा यत्र-तत्र श्रीगङ्गाधरकविरत्नकृत “जल्पकल्पतरु’ की हिन्दी व्याख्या एवं श्लोकानुक्रमणिका सहित

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Chinta Haran Jantri 2022-23

Current price is: ₹60.00. Original price was: ₹70.00.
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Chinta Haran Jantri Samvat 2078-79  (Year 2022-23) Pt. Bachan Prashad Tripathi Ramal Samrat, Tantrik Shiromani, Sitapur

श्री गणेशाय नमः ।।

चिन्ताहरण जंत्री अर्थात् भाग्योदय पञ्चांग विक्रम संवत्

प्रवर्तक एवं आद्य सम्पादक

स्व. पं. बचान प्रसाद त्रिपाठी, रमलाचार्य रमल सम्राट तांत्रिक शिरोमणी

पूर्व सम्पादक

स्व.डॉ.पं.रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी, ‘निर्भय’ ज्योतिषशास्त्री, दैवज्ञरत्नाकर, तंत्राचार्य

स्व.पं.सुशील कुमार त्रिपाठी, ‘अभय’

सम्पादक

ज्यो.दिव्या त्रिपाठी

सह-सम्पादक

अंकित त्रिपाठी