Chinta Haran Panchang 2022-23

Current price is: ₹70.00. Original price was: ₹80.00.
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Chinta Haran Panchang Samvat 2078-79  (Year 2022-23)

चिन्ताहरण जंत्री, चिन्ताहरण पंचांग ये दोनों हिन्दी भाषा में प्रकाशित भारत की एक लोकप्रिय जन्त्री पंचांग है। चिन्ताहरण जंत्री के आदि प्रवर्तक श्री पं.बचान प्रसान त्रिपाठी रमलाचार्यजी महाराज ने अपने करमकलों द्वारा ५५ वर्षों से अधिक पहले इसका शुभारम्भ किया था तब से आज तक इस जंत्री का प्रकाशन सुचारु रूप से हो रहा है, आज से ३० वर्ष पहले इसके बृहन्न संस्करण के रूप में चिन्ताहरण पंचांग प्रकाशित किया गया था, जो आज भी प्रकाशित हो रहा है वर्तमान में चिन्ताहरण जंत्री एवं चिन्ताहरण पंचांग के सम्पादक-मृत्युञ्जय त्रिपाठी हैं। इस जंत्री एवं पंचांग में आपको वे सभी विषय मिलेंगे जो पिछले १० से ३० वर्ष पहले के जंत्री व पंचांग में मिलते थे|

Chudakaran – Sanskaar (with Pooja Vidhi)

30.00
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Chudakaran – Sanskaar ( with Pooja Vidhi ) by Dr Mahendra Panday Edited by Prof. Ram Murti Sharma Published by Sampurnanand Sanskrit University, Varanasi

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की प्रकाशन-प्रन्थमालाओं ने प्राय्य भारतीय विद्याओं की प्रायः समस्त शाखाओं को अभिव्याप्त किया है। इस विश्वविद्यालय के द्वारा माननीय कुलपति प्रो. राममूर्ति शर्मा जी की प्रेरणा से एक नयी ग्रन्थमाला ‘संस्कार ग्रन्थमाला ‘ का प्रवर्तन हुआ है।

Complete Four Veds Samhita (Charo Ved) Rigveda, Samaveda, Yajurveda, Atharvaveda

Price range: ₹1,150.00 through ₹14,350.00
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Rgveda Samhitā (Part I to V)

With Shri Sayanacharya’s Bhasya and its Hindi Translation

By Dr. Bhishmadatt Sharma Sahityacharya, M.A., M.Ed., Ph.D. Former Reader, Deptt. of Education, N.A.S. College, Meerut (U.P.)

SAMAVEDASAMHITA Along with SAYANABHASYA

Edited with Hindi Translation By Pt. Ramswaroop Sharma Gaud

ŚRIMAD-VĀJASANEYI-MADHYANDINA SUKLAYAJURVEDA-SAMHITA (Text and Padapāṭha)

With the Mantra-Bhasya of Srimad-Uvaṭācārya & The Vedadīpa-Bhasya of Sriman Mahidhara (With Appendices & Mantra-Koşa)

Edited by Vasudeva Lakṣmaṇa Šāstri Paṇasīkara Along with The ‘Tattvabodhini’ Hindi Commentary by Dr. Ramakrishna Shastri

ATHARVA-VEDA-SAMHITĀ Along with SAYANABHASYA Volume 1 to 8

Edited with Hindi Translation By Pt. Ramswaroop Sharma Gaud

सम्पूर्ण ऋग्वेद संहिता (५ भाग में) , अर्थर्ववेद संहिता ( ८ भाग में) , सामवेद संहिता, यजुर्वेद संहिता संस्कृत तथा हिंदी अनुवाद सहित चौखम्बा , काशी द्वारा प्रकाशित

 

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Dashawatar

25.00
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779 Dashavatar ( Ten Avatars of God) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

In this book, we get to read about the Prime Stories of Ten Avatars of God in brief. This is a beautiful book with colourful pictures for children’s rites and knowledge enhancement. By reading this, we get information about our great books.

इस पुस्तक में भगवान के 10 अवतार के बारे में जानकारी मिलती है तथा उससे संबंधित कथा पढ़ने को मिलती है |

इस पुस्तक में भगवान का मत्स्य अवतार, कच्छप अवतार, वराह अवतार, नरसिंह अवतार, वामन अवतार, परशुराम अवतार, रामावतार, कृष्णावतार,बुद्धा अवतार, कलिक अवतार का वर्णन है |

Dasmahavidya

25.00
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1278 Dasmahavidya in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

दशमहाविद्या की पुराणों तथा अन्य वैदिक, धार्मिक, शास्त्रीय ग्रन्थोंमें अतुलनीय महिमा बतायी गयी है।  इस पुस्तक द्वारा दसमहाविद्या के दसों स्वरूपों के उद्धव, उद्देश्य, उपासना-विधि और इससे प्राप्त होनेवाले फलोंका अत्यन्त सरल ढंगसे कथाके रूपमें वर्णन किया गया है। पुस्तकमें आर्टपेपरपर छपे हुए दसमहाविद्या के दसों स्वरूपों के अत्यन्त आकर्षक रंगीन चित्र भी दिये गये हैं। इस पुस्तकके अध्ययन-मनन और चित्रोंके दर्शन-अवलोकनद्वारा भक्त, साधक और सामान्यजन भी भरपूर लाभ उठा सकते हैं।

 

Devarshi Narad

25.00
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751 Devarshi Narad by Gita Press, Gorakhpur

भगवद्भक्ति के प्रधान आचार्य लोक-प्रसिद्ध परम भागवत देवर्षि श्रीनारद का महान् चरित्र जगत्के लिये परम आदर्श है। देवर्षि नारद ज्ञान के स्वरूप, भक्ति के सागर, परम पुनीत प्रेम के भण्डार, दया के निधान, विद्या के खजाने, आनन्द की राशि, सदाचार के आधार, सर्वभूतों के सुहृद, विश्व के सहज हितकारी, अधिक क्या वे समस्त सद्गुणों की खान हैं। नारद का चरित्र अपार है, उसका पूरा संकलन और प्रकाशन तो असम्भव है, उनके जीवन की कुछ इनी-गिनी घटनाओं और उनके थोड़े-से उपदेशों का यह संग्रह प्रकाशित करने में गीताप्रेस के संचालक अपना बड़ा सौभाग्य समझते हैं। देवर्षि नारद सारे विश्व-प्राणियों के-देवता, मनुष्य, राक्षस सभी के समान आदरणीय और पूजनीय हैं|

 

Devi Stotra Ratnakar

50.00
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1774 Devi Stotra Ratnakar with Hindi translation by Gita Press, Gorakhpur

इस पुस्तक में प्रधान रूप से महादेवी के अनन्त रूपों में कुछ मुख्य स्वरूपों तथा गंगा, यमुना आदि पुण्यतोया नदियों और तुलसी, षष्ठी आदि देवियों की स्तुतियों का एकत्र संकलन किया गया है। साथ ही सर्वसाधारण भी अर्थानुसंधान कर सकें, इस आशयसे स्तोत्रों का हिन्दीभाषानुवाद भी साथ में दिया गया है। मूल पाठ की दृष्टि से ‘श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र’ तथा देवी के कुछ ललित ध्यान-स्वरूप भी हिन्दी अर्थके साथ दिये गये हैं। ग्रन्थके अंतमें विविध देवियों की आरतियाँ आदि भी संग्रहीत हैं।

In this book, the praise of Mahadevi, Sahastranama, Aarti, and hymns related to them are stored in one place, which facilitates the devotees in reading, reciting, and chanting. with Hindi Translation

 

Devibhagwat Ki Pramukh Kathyen (Stories of Devi Bhagwat)

35.00
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1647 Devibhagwat Ki Pramukh Kathyen (Stories of Devi Bhagwat) in Hindi with pictures by Gita Press Gorakhpur.

इस पुस्तक में देवी भागवत की प्रमुख कहानियाँ पढ़ने को मिलती है |बच्चो के संस्कार तथा ज्ञान वर्धन के लिए छोटे में रंगीन चित्रों के साथ बहुत ही सुन्दर पुस्तक है | इसे पढ़कर हमारे महान ग्रंथो के बारे में जानकारी मिलती है |

Dwadash Jyotirling (Gita Press)

40.00
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Dwadash Jyotirling book from Gita Press, Gorakhpur

Description of 12 Dwadsh Jyotirling and their History, Important Festivals, Pooja Time, Nearby pilgrimage, Transportation, Convyence and place to stay. Also Various Shlok, Stotra, Important information about Shiva Pooja, Ling Rahasya, Aarti and other enlightening things.

Easy Sanskrit Grammar

145.00
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Saral Sanskrit Vyakarn written by Pt. Dwaraka Prashad Mishra Shastri Published by Chowkhamba, Kashi

संस्कृत भाषा के व्याकरण के नियमों द्वारा शब्दों का श्रेणीकरण किया गया है। इनके परस्पर सम्बन्धों को बताया गया है । व्याकरण उनके भित्र प्रकारों के पहिचानने की रीति बताता है। संस्कृत का व्याकरण बहुत स्पष्ट है। इसको समझने पर संस्कृत भाषा का ज्ञान प्राप्त करने में सरलता होती है ।

Ekadash Rudra (Shiva ) Large Picture book

80.00
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1156 Ekadash Rudra (Shiva ) Large Picture book by Gita Press, Gorakhpur

Story of Rudra (Shiva) Shambhu,Pinaki, Girish.Sthanu, Bharg,Sadashiva, Shiv,Har,Sharv,Kapali, Bhav,Gangavataran,Audhardani Bhagwan Shiv, Hariharatam Roop of Lord Shiva, Ardhnarishwar Shiva,Panch Mukh and Panch Murti Shiva,Mahamrityunjaya

एकादश रुद्रों की विभूति समस्त देवताओं में विद्यमान है। वैसे तो भगवान् रुद्रदेव का सम्यक् वर्णन सामान्य मस्तिष्क से परे है। फिर भी सर्वसाधारण को भी – शम्भु, पिनाकी, गिरीश, स्थाणु, भर्ग, सदाशिव, शिव, हर, शर्व, कपाली तथा भव- इन एकादश रुद्रोंका परिचय सुलभ हो जाय, इसी भावनासे प्रेरित होकर गीताप्रेसने श्रीरामसागर पाण्डेयद्वारा प्रस्तुत चित्ताकर्षक आवरणसहित सचित्र एकादश रुद्रोंका परिचय जनमानस तक पहुँचाने का एक लघु प्रयास किया है। आशा एवं विश्वास है कि शिवभक्तों के लिये यह पुस्तक अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगी

 

Enlightenment through Humanity & Spirituality

299.00
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Enlightenment through Humanity & Spirituality, Book by Dr. Hari Prasad Kanoria

This book is a collection of articles on Religion and enlightenment., Meditation, God and Goddess, Chakra-Kundalini and various other topics for spiritual awakening. There is also a Chakra-Kundalini Chart with detail description included with this book.

Gajendra Moksha

5.00
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225 Gajendra Moksha (Sanskrit- Hindi) by Gita Press, Gorakhpur.

गजेन्द्र कृत इस स्तवन का आर्तभावसे पाठ करने पर लौकिक-पारमार्थिक महान् संकटों और विघ्नों से छुटकारा मिल जाता है और निष्काम भाव होने पर अज्ञान के बन्धन से छूटकर पुरुष भगवान्को प्राप्त हो जाता है। स्वयं भगवान्का वचन है कि ‘जो रात्रिके शेषमें (ब्राह्ममुहूर्तके प्रारम्भमें) जागकर इस स्तोत्रके द्वारा मेरा स्तवन करते हैं, उन्हें मैं मृत्यु के समय निर्मल मति (अपनी स्मृति) प्रदान करता हूँ।’ और ‘अन्ते मतिः सा गतिः’ के अनुसार उसे निश्चय ही भगवान्की प्राप्ति हो जाती है

 

Ganesh Stotra Ratnakar

50.00
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2024 Ganesh Stotra Ratnakar with Hindi translation by Gita Press, Gorakhpur

इस पुस्तक में भगवान् गणेश की स्तुति, सहस्रनाम, आरती, भजन और उनसे सम्बन्धित स्तोत्रों को एक स्थान पर संगृहीत किया गया है , जिससे भक्तजनों को पठन पाठन, कीर्तन और मनन करने में सुविधा हो। हिंदी अनुवाद के साथ

In this book, the praise of Lord Ganesh, Sahastranama, Aarti and hymns related to them are stored in one place, which facilitates the devotees in reading, reciting and chanting. with Hindi Translation

Shiva Stotra Ratnakar by Gita Press, Gorakhpur

Ganga Mahatmya

10.00
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2248 Ganga Mahatmaya (Importance of various ritual at Ganga Ji, its benefits and pictures) by Gita Press Gorakhpur.

गंगा जी की महिमा , गंगा गौरव, गंगा जी के नाम कीर्तन का फल, गंगा जी के स्मरण का फल , गंगा को उद्देश कर के यात्रा करने का फल , गंगा जी के दर्शन का फल,  गंगा अवतरण चित्र , गंगा जी के विविध स्वरूप का अंकन , हिमालय क्षेत्र के गंगा तीर्थ, गंगा तटवर्ती तीर्थ स्थल , गंगा जी के अन्य चित्रों का अंकन, गंगा जी के स्पर्श का फल , गंगा जी को प्रणाम करने का फल. गंगा जी के तट पर निवास का फल , गंगा जी के सेवन का फल , गंगा जी के शरण ग्रहण का फल , गंगा जलपान का फल , गंगाजल तर्पण का फल , गंगा जी में अस्थिपात का फल , तुलसीदास जी कृत गंगा जी की प्रार्थना, गंगा जी की आरती |

Garbhdhan-Punsvan-Simntonnyan-Sanskaar (with Pooja Vidhi)

30.00
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Garbhdhan-Punsvan-Simntonnyan-Sanskaar ( with Pooja Vidhi ) by Dr Kamla Kant Tripathi Edited by Prof. Ram Murti Sharma Published by Sampurnanand Sanskrit University, Varanasi

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की प्रकाशन-प्रन्थमालाओं ने प्राय्य भारतीय विद्याओं की प्रायः समस्त शाखाओं को अभिव्याप्त किया है। इस विश्वविद्यालय के द्वारा माननीय कुलपति प्रो. राममूर्ति शर्मा जी की प्रेरणा से एक नयी ग्रन्थमाला ‘संस्कार ग्रन्थमाला ‘ का प्रवर्तन हुआ है।

Gayatri Brahmavidya on Sri Vidya(with Hindi Translation)

350.00
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Gayatri Brahmavidya on Sri Vidya (with Hindi Translation)  Published by Chowkhamba, Kashi
Author & Editor Goswami Prahlad Giri Vedantakeshari’

प्रस्तुत ग्रन्थमें दो खण्ड हैं-ज्ञानखण्ड तथा सपर्याखण्ड। ज्ञान खण्ड में पीठशक्ति श्रीगायत्री ब्रह्मविद्या के पारम्परिक त्रिबीजा, त्रिपदा तथा तुरीया ब्रह्मगायत्री मन्त्रों के अत्यन्त गूढ़ रहस्यों का निरूपण सरल भाषा में किया गया है, जबकि सपर्याखण्ड के अन्तर्गत स्वदीक्षा की विधि, पूजा विधि तथा वन्दना का निरूपण हुआ है। यह एक सम्पूर्ण पद्धति है। ग्रन्थ का मूल संस्कृत तथा अनुवाद हिन्दी भाषा में निरूपित है। यह संस्करण श्रीगायत्री ब्रह्मविद्या परम्परा का अत्यन्त उपयोगी ग्रन्थरत्न है।

Gheranda Samhita (with Hindi Translation)

60.00
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Gheranda Samhita (with Hindi Translation) by Ajay Kumar Uttam Published by Chowkhamba, Kashi

घेरण्ड संहिता योग तन्त्र का एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है । इस ग्रन्थ के रचयिता महर्षि घेरण्ड हैं। ग्रन्थ घेरण्ड एवं चण्डकापालि के संवाद के रूप में लिखा गया है। इस ग्रन्थ में योग की तान्त्रिक पद्धति का वर्णन किया गया है। ग्रन्थ में यौगिक षट्कर्मो- – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, मुद्रा एवं समाधि का विस्तार से वर्णन किया गया है ।

Gita Chintan

70.00
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11 GITA_CHINTAN  by Gita Press Gorakhpur.

श्रीमद्भगवद्गीता साक्षात् भगवान् श्रीकृष्ण के श्रीमुख की वाणी है। इसलिये वह सर्वशास्त्रमयी है-सारे शास्त्रों का सार भरा हुआ है। इसकी महिमा अनन्त है। हमारे शास्त्रों में स्थान-स्थान पर इसकी महिमा का वर्णन किया गया है। चाहे मनुष्य किसी भी धर्म या सम्पदाय को माननेवाला हो, गीता का उपदेश किसी भी दिशा या दशा में पड़े हुए प्राणी को ठीक उपयुक्त मार्ग पर लाकर उसे कल्याण की ओर लगा देता है। भिन्न-भिन्न रुचि और अधिकार रखनेवाले मनुष्यों को उनकी योग्यता के अनुसार ही कर्तव्य-कर्म में प्रवृत्त कर भगवान्की ओर गति करा देना ही इसका मुख्य तात्पर्य है।

प्रस्तुत संग्रह श्रद्धेय भाई जी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार के गीता-विषयक लेखों, विचारों, पत्रों आदि का संग्रह है जो समय समय पर ‘कल्याण’ में प्रकाशित हुए थे। जो भाई-बहिन इस संग्रह को मनन पूर्वक पढ़ेंगे एवं अपने जीवन में उन बातों को उतारेंगे, उनका जीवन उन्नति की सर्वोच्च सीमा तक पहुँच सकता है।

This is the holiest book of Hindu religion and considered as the sound of god itself. This book shows the human being a way of life.

 

Gita Dainandini ( Gita Press Diary 2026)

150.00
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2278 Gita Dainandini (Gita Press Diary 2026) by Gita Press, Gorakhpur

यद्यपि गीता-पाठ के लिये गीताप्रेस से गीता के अनेक संस्करण प्रकाशित हैं। किन्तु गीता-दैनन्दिनी का यह संस्करण प्रतिदिन गीता-अभ्यास तथा अपने पारमार्थिक विचारों को उसमें संकलित करने के प्रमुख उद्देश्य से ही प्रकाशित किया जाता है। इसके अतिरिक्त यह अनेक कल्याणकारी लेखों, संक्षिप्त-पंचांग, व्रत पर्व आदि अनेक व्यवहारोपयोगी सामग्री से सुसज्जित होने के कारण सब के लिये नित्य उपयोगी है।

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Gita Prabodhani (Swami Ramsukh Das)

80.00
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A brief explanation of Srimad Bhagwat Gita by Swami Ramsukhdas in Sanskrit with translation in Hindi by Gita Press Gorakhpur. This is the holiest book of Hindu religion and considered as the sound of god itself. This book shows the human being a way of life.

Binding edition.